पुणे पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल 2026 में बोलते हुए सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने संयुक्त थिएटर कमांड के गठन को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में बताया और कहा कि यह महत्वाकांक्षी सैन्य सुधार अब “लगभग पूरा” हो चुका है – जो इस ओर इशारा करता है कि भारत भविष्य के युद्ध लड़ने के तरीके में बड़े बदलाव की दहलीज़ पर खड़ा है।
हालांकि, इस दावे ने रक्षा विशेषज्ञों और उत्साही वर्ग के बीच बेचैनी भी पैदा कर दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारतीय सेनाओं के पास थिएटर कमांड को मजबूती देने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं ? – खासकर वायुसेना के पास, जो पहले ही लड़ाकू विमानों और परिवहन विमानों की भारी कमी से जूझ रही है I साथ ही कमान और नियंत्रण को लेकर भी संशय है – क्या थिएटर कमांडर सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करेंगे या रक्षा मंत्री की भूमिका निर्णायक बनी रहेगी?
गौरतलब है कि थिएटर कमांड की अवधारणा नई नहीं है। इसकी नींव कारगिल समीक्षा समिति की सिफारिशों में पड़ी, जिसे 2016 में शेकटकर समिति ने आगे बढ़ाया और 2020 में तत्कालीन सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने इसे मजबूती से आगे रखा। बावजूद इसके, सीमित संसाधनों का हवाला देते हुए भारतीय वायुसेना ने इस मॉडल पर आपत्ति जताई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार ज़मीनी हकीकत बनने में अभी कई साल ले सकता है।


