म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की एंट्री ने ऐसा तूफान खड़ा कर दिया, जिसकी गूंज सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सुनाई दे रही है। वायरल वीडियो में दिखता है कि हाई प्रोफाइल सुरक्षा सम्मेलन में प्रवेश करते समय जर्मन सुरक्षा कर्मी उनसे आईडी मांगते हैं। कुछ लोग इसे सख्त अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल बता रहे हैं, जहां पद और ताकत से ज्यादा नियम चलते हैं। लेकिन इंटरनेट पर सवालों की बाढ़ है, क्या दुनिया अब पाकिस्तान और उसके सबसे बड़े जनरल को पहचानने में भी दिलचस्पी नहीं रखती? क्या यह सिर्फ सुरक्षा जांच थी या वैश्विक मंच पर बदलती हैसियत की झलक?
विवाद यहीं नहीं थमा। जर्मनी स्थित सिंधी संगठन जेय सिंध मुत्ताहिदा महाज ने उनके सम्मेलन में शामिल होने पर कड़ा विरोध दर्ज किया और पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए। 1971 की घटनाओं से लेकर कथित मानवाधिकार उल्लंघन, राजनीतिक दखल और क्षेत्रीय अस्थिरता तक कई मुद्दे फिर से उछाले गए। पाकिस्तान इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है, लेकिन सोशल मीडिया की अदालत में फैसला भावनाओं से होता है, दस्तावेजों से नहीं। एक छोटी सी आईडी चेक ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति, छवि और ताकत की बहस को फिर से भड़का दिया है।


