मध्य पूर्व के समुद्री मोर्चे पर तनाव खतरनाक मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। खबरों के अनुसार, अमेरिका द्वारा ईरान के एक जहाज पर हमले के बाद ईरान ने पलटवार करते हुए अमेरिकी ऑयल टैंकर को निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि जिस ईरानी जहाज पर हमला हुआ, वह भारत के साथ सैन्य अभ्यास के बाद लौट रहा था। इस घटना ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव को और भड़का दिया है, जो दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई लाइनों में से एक माना जाता है। इसी बीच ईरान द्वारा तुर्की पर भी हमला किए जाने की खबरों ने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया है, क्योंकि तुर्की नाटो का सदस्य है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह टकराव अब क्षेत्रीय झड़प से आगे बढ़कर बड़े युद्ध की आहट बन रहा है।
इस उथल पुथल के बीच सबसे बड़ा सवाल वैश्विक तेल सप्लाई पर मंडरा रहा है। दुनिया का बड़ा हिस्सा, खासकर एशियाई देश, अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं। भारत के लिए यह रास्ता और भी अहम है क्योंकि देश के अधिकांश तेल आयात इसी समुद्री मार्ग से गुजरते हैं। अगर यह टकराव और गहराता है तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारत अमेरिका और ईरान दोनों के बीच संतुलन बनाते हुए कूटनीतिक पहल करेगा, ताकि क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम किया जा सके। फिलहाल खाड़ी की लहरों में उठती यह टकराव की आग केवल दो देशों तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा राजनीति को झकझोरने की क्षमता रखती है।


