भारतीय समुद्री मोर्चे पर बड़ा धमाका! National Green Tribunal ने 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक की ग्रेट निकोबार इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को हरी झंडी देकर हिंद महासागर में नई रणनीतिक हलचल पैदा कर दी है। Galathea Bay के पास बनने वाला कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, ड्यूल यूज सिविल मिलिट्री एयरपोर्ट और विशाल टाउनशिप अब सिर्फ विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा का दुर्ग बनने जा रहे हैं। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि पर्यावरण मंजूरी में पर्याप्त सुरक्षा उपाय हैं और अब इनका सख्ती से पालन किया जाए। विरोध करने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए अदालत ने यह भी माना कि इस रणनीतिक कदम से हिंद महासागर में भारत की पकड़ और मजबूत होगी।
दूसरी ओर, यह फैसला सीधे तौर पर चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों को जवाब माना जा रहा है। जिस इलाके को बीजिंग अपनी तथाकथित स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति के तहत मजबूत करना चाहता है, वहीं भारत अब अपनी एक्ट ईस्ट नीति के जरिए चौबीसों घंटे निगरानी और युद्ध तैयारी की नई चौकी खड़ी करने जा रहा है। हिंद महासागर अब सिर्फ व्यापार का मार्ग नहीं, बल्कि भारत और चीन के बीच रणनीतिक टकराव का केंद्र बन चुका है। ग्रेट निकोबार परियोजना से भारत न केवल वैश्विक समुद्री व्यापार में अपनी भूमिका बढ़ाएगा, बल्कि दुश्मन की हर हलचल पर पैनी नजर रखने के लिए एक सशक्त समुद्री कवच भी तैयार करेगा।


