मंदाकिनी की बाढ़ में तैर गया बेटा, मां-बहन को बचाने के लिए लगा दी जान की बाजी
लेखक: Administrator | 10 September 2026, 10:02 AM | 1 व्यूज़

मां की जिंदगी पर संकट आया तो बेटे ने अपनी जान की परवाह नहीं की। सामने उफनती मंदाकिनी का तेज बहाव था, लेकिन मां और बहन को बचाने की चिंता ने किशन मोदनवाल के कदम नहीं रोके। घर की दूसरी मंजिल में तीन से चार फीट तक पानी भर चुका था और छत पर जाने के लिए सीढ़ी तक नहीं थी।
बाहर बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बह रहा था कि उसमें उतरना किसी बड़े खतरे से कम नहीं था। इसके बावजूद किशन पानी में कूद गया। वह दूसरे घर से सीढ़ी लेने के लिए बाढ़ के तेज बहाव के बीच तैरता हुआ निकल पड़ा, ताकि अपनी मां और बहन को घर से सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
घर में पानी भरने लगा तो मां ने बेटे को किया फोन
मामला चित्रकूट के रामघाट का है। शनिवार को यहां मंदाकिनी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा था। किशन की मां पार्वती मोदनवाल ने बताया कि उस समय उनका बेटा दुकान का सामान सुरक्षित रखने के लिए गया हुआ था। इसी बीच घर में भी पानी घुसने लगा।
स्थिति बिगड़ती देख पार्वती ने मोबाइल फोन के जरिए बेटे को इसकी जानकारी दी। देखते ही देखते पानी दूसरी मंजिल तक पहुंच गया। मां और बेटी वहां फंस गईं और उनके पास बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा था।
परिवार की ओर से पुलिस और प्रशासन को भी सूचना दी गई, लेकिन मंदाकिनी का बहाव इतना तेज था कि तत्काल मौके पर पहुंचकर मदद करना मुश्किल हो रहा था।
मां को बचाने के लिए बाढ़ में उतर गया बेटा
जब किशन को पता चला कि उसकी मां और बहन घर में फंसी हैं तो उसने किसी मदद का इंतजार नहीं किया। वह आटो स्टैंड की तरफ से बाढ़ के पानी में उतर गया।
तेज बहाव के बीच तैरते हुए किशन दूसरे घर तक पहुंचा। वहां से उसने एक सीढ़ी ली और उसे लेकर वापस अपने घर की तरफ चल पड़ा। लेकिन इस दौरान उसके सामने एक और मुश्किल खड़ी हो गई।
वापसी के रास्ते में सीढ़ी बिजली के पोल में फंस गई। तेज धार और बढ़ते पानी के बीच भी किशन ने हिम्मत नहीं छोड़ी। उसने सीढ़ी को पोल से निकालने की कोशिश की और आखिरकार उसे निकाल लिया। इसके बाद वह किसी तरह सीढ़ी लेकर अपने घर तक पहुंचा।
बेटे की इस बहादुरी का जिक्र करते हुए पार्वती की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें लग रहा था कि शायद उनकी जिंदगी नहीं बच पाएगी। लेकिन बेटे ने अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें और उनकी बेटी को सुरक्षित निकालने का रास्ता तैयार किया।
मंदाकिनी ने दिखाया सदी का सबसे विकराल रूप
चित्रकूट में इस बार मंदाकिनी ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि पूरे इलाके में तबाही का मंजर देखने को मिला। 14 अगस्त से 2 सितंबर के बीच महज 19 दिनों में नदी नौ बार खतरे के निशान को पार कर गई।
मंदाकिनी के खतरे का निशान 126.500 मीटर है। नदी कभी कुछ घंटों के लिए नीचे आती, लेकिन उसके बाद फिर जलस्तर तेजी से बढ़ जाता। लगातार बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन और स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं।
29 अगस्त को स्थिति सबसे ज्यादा भयावह हो गई, जब मंदाकिनी का जलस्तर 135.200 मीटर तक पहुंच गया। इसे सदी की सबसे बड़ी बाढ़ का रिकॉर्ड बताया गया।
धार्मिक और पर्यटन स्थल भी पानी में डूबे
मंदाकिनी के बढ़े जलस्तर का असर चित्रकूट के कई प्रमुख इलाकों और धार्मिक स्थलों पर पड़ा। रामघाट से लेकर सती अनुसुइया, स्फटिक शिला और जानकीकुंड जैसे पौराणिक स्थल भी बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए।
इसके अलावा पुरानी लंका, कामदगिरि मार्ग, आरोग्यधाम, तरौंहा और नदी के किनारे बसी कई बस्तियां भी जलमग्न हो गईं। लोगों को अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
बाढ़ की भयावह स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 10 हजार से अधिक परिवारों की गृहस्थी उजड़ गई। वहीं पांच हजार से ज्यादा लोग बाढ़ के बीच फंस गए।
वायुसेना और एनडीआरएफ ने संभाला मोर्चा
बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान चलाया गया। स्थिति को देखते हुए वायुसेना और एनडीआरएफ की मदद ली गई। कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए राहत और बचाव दलों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
एक तरफ जहां बाढ़ ने हजारों परिवारों के सामने मुश्किलें खड़ी कर दीं, वहीं किशन मोदनवाल की कहानी इस आपदा के बीच हिम्मत और परिवार के प्रति जिम्मेदारी की मिसाल बनकर सामने आई है।
उफनती मंदाकिनी के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर मां और बहन को बचाने के लिए किशन ने जो कदम उठाया, वह बताता है कि मुश्किल से मुश्किल हालात में भी अपनों को बचाने का जज्बा इंसान को असाधारण हिम्मत दे सकता है।
